पतंजलि गुरुकुलम्

Patanjali Gurukulam

Under the Aegis of Patanjali Yogpeeth Trust

School No. : 01
Affiliation No.: BSB/2022/UK/00001
Udise Code: 05130805011
First School of Bhartiya Shiksha Board

नियम एवं निर्देश

(Rules and Regulation)

परम्परागत शिक्षा ही नहीं अपितु संस्कारयुक्त महामानव सृजन का अनुपम संस्थान पतंजलि गुरुकुलम् नूतन विचार एवं दिव्य संकल्प के साथ संशोधित नियम

पतंजलि गुरूकुलम् औपचारिक शैक्षणिक संस्थान (Formal Educational Institution) नहीं है अपितु भारतीय ज्ञान-परंपरा, संस्कार, योग, शास्त्र-अध्ययन और जीवन कौशल पर आधारित समग्र शिक्षा का केंद्र है । हम ऋषि-ऋषिकाओं के उत्तराधिकारियों के रूप में अतिमानस चेतना एवं दिव्य नेतृत्व युक्त व्यक्तित्व तथा दिव्यचरित्र का निर्माण करना चाहते हैं। पतंजलि संस्थान योग्य एवं अनुशासित विद्यार्थियों की आजीविका प्रबंधन से लेकर उनकी समस्त प्रतिभाओं का सदुपयोग करने के लिए पूर्णरूपेण प्रतिबद्ध है। शिक्षा के समग्र उद्देश्य के संदर्भ में व्यापक चिंतन के उपरांत कुछ नियमों में परिवर्तन एवं संशोधन किया गया है ।

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पतंजलि गुरुकुलम् में प्रवेश हेतु अभिभावक मुख्यतः कक्षा 4 में केवल बालिकाओं तथा कक्षा 5 व 6 में बालक एवं बालिकाओं का पंजीकरण करा सकते हैं। अपवाद रूप में कक्षा 7 एवं 8 में भी प्रवेश दिया जाएगा। गुरुकुलीय नियमों का पालन करना सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य होगा।

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कक्षा 4 से 10 के लिए शिक्षा सहयोग राशि मात्र एक लाख रूपये प्रतिवर्ष एवं कक्षा 11 व 12 में मात्र 50,000/- रुपये रहेगी। प्रवेश आदि सहयोग राशि मात्र 36,000/- रुपये रहेगी। विद्यार्थियों की शिक्षा की निरंतरता के लिए अभिभावक स्व-विवेक से निर्णय ले सकेंगे ।

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प्रतिवर्ष 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने पर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों हेतु 25,000/- रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। पूर्व से गुरुकुल में अध्ययनरत 10वीं कक्षा तक के छात्रों हेतु छात्रवृत्ति(सहयोग राशि) यथावत् रहेगी।

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गुरुकुलीय शिक्षा के उपरांत पतंजलि विश्वविद्यालय में स्नातक व परास्नातक के (मूल रूप से व्याकरण एवं दर्शन विषयों का चयन करने पर) विद्यार्थियों हेतु शिक्षा पूर्णतः निःशुल्क रहेगी ।

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सभी विद्यार्थी गुरुकुलम् से लेकर विश्वविद्यालय तक पूर्णरूपेण ज्ञानार्जन कर अपना निर्माण करें- यह हमारी प्रथम प्राथमिकता है फिर भी अगर कोई अभिभावक भौतिकता की आँधी का अंधानुकरण करके अपने विवेक का प्रयोग न कर किसी प्रकार के दबाव, अभाव या प्रभाव व अविवेकपूर्ण आकर्षण के चलते अपने बच्चों को बीच में ले जाना चाहें तो ले जा सकते हैं। इसमें संस्थान की ओर से बाध्यता नहीं है।